Batuk Bhairav Stotra Pdf Download in Hindi

Batuk Bhairav जी दुर्गा के पुत्र हैं ! Batuk Bhairav को पढने से व्यक्ति अपने जीवन में सांसारिक बाधाओं से दूर हो जाता है ! धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भी महाकाल भैरव स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र कहलाता है !

आज के इस अर्टिकल में आपको Batuk Bhairav के पढने का सबसे आसान तरीका बताऊंगा और साथ ही इससे होने बाले लाभ को पूरी जानकारी देने वाला हूँ तथा साथ में आप सभी को मैं Batuk Bhairav Pdf भी देने वाला हूँ जिसे आप डाउनलोड करके पढ़ सकते है और उसका लाभ ले सकते है !

भैरव स्तोत्र का पाठ क्यों करें ?

यदि आप व्यापार में बाधाओं का सामना कर रहे हैं , असफलता का सामना कर रहे हैं ! शत्रुता का सामना कर रहे , अदालती मामलों का सामना कर रहे हैं , विद्यार्धी को पढने में मन नहीं लगता , दुःख का सामना कर रहे हैं , आदि समस्याओं के आसान उन्मूलन के लिए बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए !

अगर आप अपने जीवन में खुश रहना चाहते हैं , आपका बच्चा आपका कहना नहीं नहीं मानता है , सोचा हुआ काम नहीं हो पता है , व्यापार में उन्नति पाना चाहते हो आप जरुर ही भैरव स्तोत्र का पाठ करें !

What is Batuk Bhairav Stotra

भैरव को शिव का रुद्र अवतार माना गया है ! तंत्र साधना में भी भैरव के आठ रूप अधिक प्रचलित हैं: १. भैरव को स्वीकार करना, २. रु-रु भैरव, ३. चांद भैरव, ४. क्रोधोन्मत्त भैरव, ५. भयंकर भैरव, ६. कपाली भैरव, ७. भैरव और 8. भैरव आदि शंकराचार्य ने ‘प्रपंच-सारा’ प्रणाली में अष्ट-भैरव के नाम भी लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविशांति रहस्य में सात भैरव हैं। इस ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का भी उल्लेख मिलता है। इसमें तीन बटुक-भैरव का उल्लेख है। रुद्रयामाला पद्धति में ६४ भैरवों के नामों का उल्लेख मिलता है !

Batuk Bhairav Stotra

यं यं यं यक्ष रूपं दशदिशिवदनं भूमिकम्पायमानं।
सं सं सं संहारमूर्ती शुभ मुकुट जटाशेखरम् चन्द्रबिम्बम्।।
दं दं दं दीर्घकायं विकृतनख मुखं चौर्ध्वरोयं करालं।
पं पं पं पापनाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।1।।

रं रं रं रक्तवर्ण कटक कटितनुं तीक्ष्णदंष्ट्राविशालम्।
घं घं घं घोर घोष घ घ घ घ घर्घरा घोर नादम्।।
कं कं कं काल रूपं घगघग घगितं ज्वालितं कामदेहं।
दं दं दं दिव्यदेहं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।2।।

लं लं लं लम्बदंतं ल ल ल ल लुलितं दीर्घ जिह्वकरालं।
धूं धूं धूं धूम्र वर्ण स्फुट विकृत मुखं मासुरं भीमरूपम्।।
रूं रूं रूं रुण्डमालं रूधिरमय मुखं ताम्रनेत्रं विशालम्।
नं नं नं नग्नरूपं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।3।।

वं वं वं वायुवेगम प्रलय परिमितं ब्रह्मरूपं स्वरूपम्।
खं खं खं खड्ग हस्तं त्रिभुवननिलयं भास्करम् भीमरूपम्।।
चं चं चं चालयन्तं चलचल चलितं चालितं भूत चक्रम्।
मं मं मं मायाकायं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।4।।

खं खं खं खड्गभेदं विषममृतमयं काल कालांधकारम्।
क्षि क्षि क्षि क्षिप्रवेग दहदह दहन नेत्र संदिप्यमानम्।।
हूं हूं हूं हूंकार शब्दं प्रकटित गहनगर्जित भूमिकम्पं।
बं बं बं बाललील प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।5।।

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय कल्पांत दहन प्रभो!
भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातु महर्षि!!

Batuk Bhairav Stotra Benefits

  • बटुक भैरव स्तोत्र के पाठ से निश्चित रूप से आपके सभी कार्य सफल मिलेगी ,
  • व्यवसाय और जीवन में पूर्ण सफलता,
  • परेशानियाँ दूर हों जायेगी ,
  • शत्रु पर विजय प्राप्त होगी ,
  • आपको अपने व्यवसाय में समृद्धि मिलेगी,
  • मार्ग से बाधाएँ हट जाएँगी ,
  • अदालत के चक्करों से छुटकारा भी मिल जायेगा !
  • बटुक भैरव के स्तोत्र से व्यक्ति अपने जीवन में सांसारिक बाधाओं को दूर कर सांसारिकजीवन में लाभ उठा सकता है !

Proccess of Batuk Bhairav Stotra

  • स्नान आदि कर लें , एवं मन को साफ रखें !
  • घर को एवं मंदिर को अछे से साफ कर लें !
  • ये सारा प्रक्रिया करने के बाद भैरव देव को ध्यान करते हुए प्रणाम करें !
  • स्तोत्र का पाठ शुरू करें !
  • पाठ ख़त्म होने के बाद भोग लगायें !
  • तत्पश्चात सभी को प्रसाद बाटे !

Batuk Bhairav Stotra Download in Hindi

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