Ganesh Chalisa Lyrics and Pdf Free Download

आज मैं आप सभी को Ganesh Chalisa Lyrics और साथ में आप सभी को Ganesh Chalisa Pdf भी दूंगा! आप सब यहाँ से Ganesh Chalisa Lyrics को हिन्दी और इंग्लिश भाषा में पढ़ और इसे यहाँ से डाउनलोड करके पढ़ सकते है!

गणेश चालीसा का पाठ करना सभी व्यक्ति के लिए काफी लाभदायक होता है! गणेश चालीसा का पाठ किसी भी पूजा पाठ, अनुष्ठान से पहले गणेश जी का आवाहनं या उनके मंत्रो का उच्चारण बहुत ही जरुरी होता है! वह पूजा चाहे कोई भी उसमे गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम करना आवश्यक माना जाता है! नही तो वह पूजा अधूरी मानी जाती है!

Benefits of Ganesh Chalisa PDF

गणेश चालीसा का पाठ करना बहुत ही लाभदायक होता है, अगर आपके घर में किसी प्रकार का कोई क्लेश है, कोई परेशानी है, अगर आपके घर के बच्चे पढ़ रहे है और आप चाहते है की आपके बच्चे उचे पद पर जाए तो ऐसे में आपको गणेश चालीसा का पाठ जरुर करना चाहिए, इससे आपके घर के सभी कलह – कलेश दूर होते है और मन चाहिए इच्छा की प्राप्ति होती है!

गणेश जी उपासना सभी को करना चाहिए, इसे बच्चो से लेकर बुजुर्ग सभी को गणेश जी की उपासना करनी चाहिए! यकीन मानिए अगर आपका कोई भी काम नही हो पा रहा है तो आप एक बार गणेश चाहिए का पाठ करके जरुर देखे आपके सभी कार्य चमत्कारिक रूप से बन जायेंगे !

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

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श्री गणेश चालीसा

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

दोहा

श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

 

 

Ganesh Chalisa Lyrics with Hindi Meaning

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श्री गणेश चालीसा

॥दोहा॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

हे सद्गुणों के सदन भगवान श्री गणेश आपकी जय हो, कवि भी आपको कृपालु बताते हैं। आप कष्टों का हरण कर सबका कल्याण करते हो, माता पार्वती के लाडले श्री गणेश जी महाराज आपकी जय हो।

॥चौपाई॥

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभः काजू॥

जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

हे देवताओं के स्वामी, देवताओं के राजा, हर कार्य को शुभ व कल्याणकारी करने वाले भगवान श्री गणेश जी आपकी जय हो, जय हो, जय हो। घर-घर सुख प्रदान करने वाले हे हाथी से विशालकाय शरीर वाले गणेश भगवान आपकी जय हो। श्री गणेश आप समस्त विश्व के विनायक यानि विशिष्ट नेता हैं, आप ही बुद्धि के विधाता है बुद्धि देने वाले हैं। हाथी के सूंड सा मुड़ा हुआ आपका नाक सुहावना है पवित्र है। आपके मस्तक पर तिलक रुपी तीन रेखाएं भी मन को भा जाती हैं अर्थात आकर्षक हैं।

आपकी छाती पर मणि मोतियां की माला है आपके शीष पर सोने का मुकुट है व आपकी आखें भी बड़ी बड़ी हैं। आपके हाथों में पुस्तक, कुठार और त्रिशूल हैं। आपको मोदक का भोग लगाया जाता है व सुगंधित फूल चढाए जाते हैं। पीले रंग के सुंदर वस्त्र आपके तन पर सज्जित हैं। आपकी चरण पादुकाएं भी इतनी आकर्षक हैं कि ऋषि मुनियों का मन भी उन्हें देखकर खुश हो जाता है। हे भगवान शिव के पुत्र व षडानन अर्थात कार्तिकेय के भ्राता आप धन्य हैं। माता पार्वती के पुत्र आपकी ख्याति समस्त जगत में फैली है। ऋद्धि-सिद्धि आपकी सेवा में रहती हैं व आपके द्वार पर आपका वाहन मूषक खड़ा रहता है।

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुची पावन मंगलकारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै। पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

हे प्रभु आपकी जन्मकथा को कहना व सुनना बहुत ही शुभ व मंगलकारी है। एक समय गिरिराज कुमारी यानि माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए भारी तप किया। जब उनका तप व यज्ञ अच्छे से संपूर्ण हो गया तो ब्राह्मण के रुप में आप वहां उपस्थित हुए। आपको अतिथि मानकार माता पार्वती ने आपकी अनेक प्रकार से सेवा की, जिससे प्रसन्न होकर आपने माता पार्वती को वर दिया।

आपने कहा कि हे माता आपने पुत्र प्राप्ति के लिए जो तप किया है, उसके फलस्वरूप आपको बहुत ही बुद्धिमान बालक की प्राप्ति होगी और बिना गर्भ धारण किए इसी समय आपको पुत्र मिलेगा। जो सभी देवताओं का नायक कहलाएगा, जो गुणों व ज्ञान का निर्धारण करने वाला होगा और समस्त जगत भगवान के प्रथम रुप में जिसकी पूजा करेगा। इतना कहकर आप अंतर्धान हो गए व पालने में बालक के स्वरुप में प्रकट हो गए।

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥

माता पार्वती के उठाते ही आपने रोना शुरु किया, माता पार्वती आपको गौर से देखती रही आपका मुख बहुत ही सुंदर था माता पार्वती में आपकी सूरत नहीं मिल रही थी। सभी मगन होकर खुशियां मनाने लगे नाचने गाने लगे। देवता भी आकाश से फूलों की वर्षा करने लगे। भगवान शंकर माता उमा दान करने लगी।

देवता, ऋषि, मुनि सब आपके दर्शन करने के लिए आने लगे। आपको देखकर हर कोई बहुत आनंदित होता। आपको देखने के लिए भगवान शनिदेव भी आये। लेकिन वह मन ही मन घबरा रहे थे ( दरअसल शनि को अपनी पत्नी से श्राप मिला हुआ था कि वे जिस भी बालक पर मोह से अपनी दृष्टि डालेंगें उसका शीष धड़ से अलग होकर आसमान में उड़ जाएगा) और बालक को देखना नहीं चाह रहे थे।

गिरिजा कछु मन भेद बढायो। उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

शनिदेव को इस तरह बचते हुए देखकर माता पार्वती नाराज हो गई व शनि को कहा कि आप हमारे यहां बच्चे के आने से व इस उत्सव को मनता हुआ देखकर खुश नहीं हैं। इस पर शनि भगवान ने कहा कि मेरा मन सकुचा रहा है, मुझे बालक को दिखाकर क्या करोगी? कुछ अनिष्ट हो जाएगा। लेकिन इतने पर माता पार्वती को विश्वास नहीं हुआ व उन्होंनें शनि को बालक देखने के लिए कहा। जैसे ही शनि की नजर बालक पर पड़ी तो बालक का सिर आकाश में उड़ गया।

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी। सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा। शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटी चक्र सो गज सिर लाये॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

अपने शिशु को सिर विहिन देखकर माता पार्वती बहुत दुखी हुई व बेहोश होकर गिर गई। उस समय दुख के मारे माता पार्वती की जो हालत हुई उसका वर्णन भी नहीं किया जा सकता। इसके बाद पूरे कैलाश पर्वत पर हाहाकार मच गया कि शनि ने शिव-पार्वती के पुत्र को देखकर उसे नष्ट कर दिया।

उसी समय भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर वहां पंहुचे व अपने सुदर्शन चक्कर से हाथी का शीश काटकर ले आये। इस शीष को उन्होंनें बालक के धड़ के ऊपर धर दिया। उसके बाद भगवान शंकर ने मंत्रों को पढ़कर उसमें प्राण डाले। उसी समय भगवान शंकर ने आपका नाम गणेश रखा व वरदान दिया कि संसार में सबसे पहले आपकी पूजा की जाएगी। बाकि देवताओं ने भी आपको बुद्धि निधि सहित अनेक वरदान दिये।

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

जब भगवान शंकर ने कार्तिकेय व आपकी बुद्धि परीक्षा ली तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा आने की कही। आदेश होते ही कार्तिकेय तो बिना सोचे विचारे भ्रम में पड़कर पूरी पृथ्वी का ही चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े, लेकिन आपने अपनी बुद्धि लड़ाते हुए उसका उपाय खोजा। आपने अपने माता पिता के पैर छूकर उनके ही सात चक्कर लगाये। इस तरह आपकी बुद्धि व श्रद्धा को देखकर भगवान शिव बहुत खुश हुए व देवताओं ने आसमान से फूलों की वर्षा की।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

हे भगवान श्री गणेश आपकी बुद्धि व महिमा का गुणगान तो हजारों मुखों से भी नहीं किया जा सकता। हे प्रभु मैं तो मूर्ख हूं, पापी हूं, दुखिया हूं मैं किस विधि से आपकी विनय आपकी प्रार्थना करुं। हे प्रभु आपका दास रामसुंदर आपका ही स्मरण करता है। इसकी दुनिया तो प्रयाग का ककरा गांव हैं जहां पर दुर्वासा जैसे ऋषि हुए हैं। हे प्रभु दीन दुखियों पर अब दया करो और अपनी शक्ति व अपनी भक्ति देनें की कृपा करें।

॥दोहा॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

श्री गणेश की इस चालीसा का जो ध्यान से पाठ करते हैं। उनके घर में हर रोज सुख शांति आती रहती है उसे जगत में अर्थात अपने समाज में प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है। सहस्त्र यानि हजारों संबंधों का निर्वाह करते हुए भी ऋषि पंचमी ( गणेश चतुर्थी से अगले दिन यानि भाद्रप्रद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी ) के दिन भगवान श्री गणेश की यह चालीसा पूरी हुई।

 

 

Ganesh Chalisa English Lyrics

।। Doha ।।

Jaya ganapati sadhguna sadana।

kavi vara badana kripaala ।

Vighna harana mangala karana।

jaya jaya girijaa laala ॥

।। Chaupai ।।

Jaya jaya ganapati gan raaju ।

mangala bharana karana shubha kaaju ॥

Jaya gajabadana sadana sukhadaataa ।

vishva vinaayaka buddhi vidhaata ॥

Vakra tunda shuchi shunda suhaavana ।

tilaka tripunda bhaala mana bhaavana ॥

Raajata mani muktana ura maala ।

svarna mukuta shira nayana vishaala ॥

Pustaka paani kuthaara trishuulam ।

modaka bhoga sugandhita phoolam ॥

Sundara piitaambara tana saajita ।

charana paaduka muni mana raajita ॥

Dhani shiva suvana shadaanana bhraata ।

gaurii lalana vishva-vidhaata ॥

Riddhi siddhi tava chanvara sudhaare ।

mushaka vaahana sohata dvaare ॥

Kahaun janma shubha kathaa tumhaari ।

ati shuchi paavana mangala kaari ॥

Eka samaya giriraaj kumaari ।

putra hetu tapa kinha bhaari ॥

Bhayo yagya jaba puurna anuupa ।

taba pahunchyo tuma dhari dvija ruupa ॥

Atithi jaani kai gauri sukhaari ।

bahuvidhi sevaa kari tumhaari ॥

Ati prasanna hvai tuma vara diinha ।

maatu putra hita jo tapa kiinha ॥

Milahi putra tuhi buddhi vishaala ।

binaa garbha dhaarana yahi kaala ॥

Gananaayaka, guna gyaana nidhaana ।

puujita prathama ruupa bhagavana ॥

Asa kahi antardhyaana ruupa hvai ।

palana para baalaka svaruupa hvai ॥

Bani shishu rudana jabahi tuma thaana ।

lakhi mukha sukha nahin gauri samaan ॥

Sakala magana, sukha mangala gaavahin ।

nabha te surana sumana varshaavahin ॥

Shambhu uma, bahu dana lutavahin ।

sura munijana, suta dekhana aavahin ॥

Lakhi ati aananda mangala saaja ।

dekhana bhi aaye shani raaja ॥

Nija avaguna guni shani mana maahin ।

baalaka, dekhan chaahata naahin ॥

Giraja kachhu mana bheda badhaayo ।

utsava mora na shani tuhi bhaayo ॥

Kahana lage shani, mana sakuchaai ।

kaa karihau, shishu mohi dikhaai ॥

Nahin vishvaasa, uma ur bhayau,

shani so baalaka dekhana kahyau ॥

Padatahin, shani driga kona prakaasha ।

baalaka shira udi gayo aakaasha ॥

Giraja giriin vikala hvai dharani ।

so dukha dasha gayo nahin varani ॥

Haahaakaara machyo kailaasha ।

shani kiinhyon lakhi suta ka naasha ॥

Turata garuda chadhi Vishnu sidhaaye ।

kaati chakra so gaja shira laaye ॥

Baalaka ke dhada upara dhaarayo ।

praana, mantra padha shankara darayo ॥

Naama ‘ganesha’ shambhu taba kiinhe।

prathama puujya buddhi nidhi, vara diinhe ॥

Buddhi pariiksha jaba shiva kiinha ।

prithvii kar pradakshina liinha ॥

Chale shadaanana, bharami bhulaIi ।

rachi baitha tuma buddhi upaai ॥

Charana maatu-pitu ke dhara linhen ।

tinake saata pradakshina kinhen ॥

Dhani ganesha, kahi shiva hiya harashe ।

nabha te surana sumana bahu barase॥

Tumhari mahima buddhi badaye ।

shesha sahasa mukha sakai na gaai ॥

Mein mati hina malina dukhaari ।

karahun kauna vidhi vinaya tumhaari ॥

Bhajata ‘raamasundara’ prabhudaasa ।

lakha prayaga, kakara, durvasa ॥

Aba prabhu daya dina para kijai ।

apani bhakti shakti kuchhu dijai ॥

 ।। Doha ।।

Shri Ganesh yah chalisa,

path karai dhari dhyan ।

Nit nav mangal gruha bashe,

lahi jagat sanman ॥

 

Sambandh apne sahstra dash,

rushi panchami dinesh ।

Puran chalisa bhayo,

mangal murti ganesha ॥

डिस्क्लेमर:- हिंदी ज्ञान किसी भी पीडीऍफ़ फाइल पर मालिकाना हक़ नही रखता है, हमने सारे पीडीऍफ़ को सिर्फ शिक्षा के उद्देश्य से यहा पर दिया है, अगर किसी को भी कोई आपत्ति है, तो वह मुझसे ईमेल [email protected] पर सम्पर्क कर सकते है! हम इस पर तुरंत कोई निर्णय लेंगे!

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