Jhutha Sach Pdf Download ! झूठा सच डाउनलोड

नमस्कार दोस्तों,
आज के इस आर्टिकल में झूठा सच Pdf झूठा देने वाले हैं ! झूठा सच एक ऐसा उपन्यास है जो हिन्दी साहित्य में इसे बहुत ही अच्छा स्थान दिया गया ! झूठा सच विभाजन से सम्बंधित उपन्यास है , हमारे अनुसार विभाजन का अब तक सबसे बढ़िया उपन्यास लगा ! बाकी आप बढ़ेंगे तो समझ में आ जाएगा ! तो चलिए जान लेते हैं झूठा सच के बारे में !

Jhutha Sach Pdf Download

झूठा सच उपन्यास के वारे में ,

झूठा सच उपन्यास यशपाल के द्वारा लिखा गया है ! झूठा सच को हिंदी का सर्वोत्कृष्ट यथार्थवादी उपन्यास है ! यशपाल की लिखी यह उपन्यास उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना में से एक है । सन 1958 -1960 में प्रकाशित यह उपन्यास विभाजन पूर्व व उसके बाद कि राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक विभिन्नताओं पर गहरा प्रकाश डालती है ! उपन्यास के केंद्र में लाहौर और दिल्ली ये दो शहर हैं ! विभाजन का इन शहरों पर असर और इन्ही के ज़रिए सम्पूर्ण भारत की उस आत्मा को टटोलने की कोशिश है यह उपन्यास ! इस वीडियो में उपन्यास की समीक्षा और उस पर मेरे विचार बताने की कोशिश की है ! उम्मीद है ये प्रयास आपको पसन्द आएगा !

झूठा सच दो भागों में लिखा गया है ,

झूठा सच का पहला भाग 1958 प्रकाशित हुआ था , झूठा सच विभाजन पर आधारित अब तक सर्व श्रेष्ठ उपन्यास है ! एवं दुसरा भाग को देश का भविष्य कहा जाता है !

यशपाल कौन हैं ?

यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर 1903 को फिरोजपुर के छाबनी में हुआ था ! इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी से पूरा था ! इन्हें बचपन से ही हिन्दी में रुचि था ! लेकिन उस समय भारत अंग्रेज के गुलाम थे, इस बजह से वो बहुत कम उम्र में ही अंग्रेज के प्रति नफरत जाग गया था ! विद्यार्थी जीवन में ही क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने कलम थामी और क्रांतिकारी से लेखक तक सफर तय किया !

झूठा सच सारांश

झूठा सच का पहला भाग साल 1943से लेकर 15 अगस्त 1947 तक वर्णन किया गया है , उपन्यास लोहौर से सम्बन्धित है , उस समय भारत का हिस्सा हुआ करता था ! कहानी की शुरुआत लोहौर के भोलापंडे गली के एक निम्न वर्गीय परिवार से होती है , परिवार का एक लड़का जयदेव पुरी जो पत्र कार है ,जो खुद को आदर्श बादी समझता है ! पूरी की वहन तारा है जो पढ़ाई कर रही है, उसे उच्च शिक्षा देना चाहते हैं ,

उसको अभी विवाह करवाना नहीं चाहते हैं ! लेकिन उसे किसी मुस्लिम लड़के से प्रेम हो जाता है, तब पूरी को बहुत बड़ा शौक लगा ! पूरी गुस्से में अपनी बहन की सादी सोमनाथ शाहनी नामक एक बईमान युवक से कर देते हैं ! पूरी की प्रेमिका कनक है , कनक एक शिक्षित और रईस परिवार से हैं ! पुरी के लेखकों से प्रभावित होकर कनक अपना दिल से बैठती है ! लेकिन पुरी का आर्थिक स्थिति और पारिवारिक स्थिति के कारण कनक को उनके परिवार पुरी से रिश्ते के लिए नकार देता है !

और यही से पूरी को पाने के लिए कनक ने अपना संघर्स शुरू कर देती है ! ये वो दौर था जब देश का प्रत्येक युवक अंग्रेज से संघर्ष करने के लिए कभी रैली, तो कभी जुलूस निकाला करते थे ! जहा देश के हर युवा आजादी के ख्वाव देख रहे होते हैं और हर जगह पर राली और जुलुश निकल रहे होते होते हैं !इसी बिच देश के बिभाजन के खबर तेजी से फैलती और नेताओ के राजनैतिक बयाँ आने लगते है , जो लोग मिलजुल कर आपसी सद्भाव से रहा करते थे , वो लाहौर शहर आज नफरतो के आग में जलने लगता है इसी बिच सारा का विवाह होता है ,

लेकिन पहले ही रात में दंगे इतने बढ़ जाते हैं , की तारा को अपना ससुराल छोड़ भाग जाना पड़ता है कोव्ह्ह दिन वो एक मुस्लिम परिवार में शरण लेती है लेकिन उसके बाद वो ऐसे गिरोह के हाथ लग जाती है ! जो इन परिसिथितियो को फायदा उठाते हुए , लडकियों को वेचने का धन्धा कर रहा होता है तभी देश का विभाजन हो जाता है !

पाकिस्तान एक अलग देश बन जाता है और देश दो नक्शों में बंट जाता है ! अब यहाँ पर सिर्फ देश ही नहीं बंटता , बल्कि देश में रह रहे लोग भी बंट जाते हैं ! किसी को किसी के खबर नहीं है , नौकरी के तलास में निकला जयदेव पूरी घर नहीं पहुँच पाया ! और वो जालंधर में ही रह जाता है ! कनक अपने दीदी जीजा के साथ नैनीताल में रह जाता है और कनक का परिवार दिल्ली पह्हुव्ह जाता है ! तारा का तो बात ही मत कीजिये , मनो तारा अपने परिवार के मर चुकी होती है ! और यही पर पहला बाग़ समाप्त हो जाता है !

झूठा सच पार्ट 2

झूठा सच का दूसरा भाग में 15 अगस्त से १९४७ से लेकर देश के दुश्रे लोक सभा चुनाब का परिणाम आने तक वर्णन किया गया है ! इसमें पाकिस्तान से आये शर्णार्थियो को जितने भी समस्या आया है जैसे आर्थिक ,सामाजिक ,राजनितिक , जातिवाद एवं धर्मबाद समस्या का वर्णन किया गया है !

जयदेव पुरी अब जालंधर में बस चूका है ,वो एक प्रेस का मालिक भी बन चूका है ,कनक भी किसी तरह से ढूढ़ते हुए वहां पहुँच जाती है ! और परिवार का पूरा विद्रोध को समाप्त कर वो विवाह कर लेती है ! कनक इस वात से बिलकुल अनजान है की उर्मिला से ये सारे घटना के बिच सम्बन्ध में रह चुकी है !

वो जयदेव के दोहरे चरित्र को समझ नहीं पाती है ! अब तारा को क्या होता है , तारा आपना प्रतिभा के बल पर बहुत ही उचा स्थान प्राप्त करती है , तारा अब दिल्ली के विमेंस वेलफेयर के के उच्चे स्थान के अधिकारी के रूप में काम कर राही है , लेकिन तारा को मुश्किले अभी भी पीछा नहीं छोडती है ,तारा को हर राह पर मुश्किले का सामना करना पड़ता है !इधर कनक भी धीरे धीरे पुरे तरीके से पूरी को पहचानने लगती है ,

उसे पहले बाला पूरी नहीं मिल पता ! पहले का पूरी एक आदर्स वादी पत्रकार था , लेकिंन वो अब एक मतलावी संपादक के रूप में देखती है , पहले का पूरी सिर्फ और सिर्फ कनक को चाहते थे लेकिन अब उनका दिल किसी और के लिए धडकता है ! आप अगर इस उपन्यास को पढेंगे तो देखेंगे की जब बटवारा हुआ तो सायद नेता भी अपना इमानदरी बेच दिए , क्योकि आजादी के पहले के नेता बहुत ही आदर्स वादी ,और समाजवादी हुआ करते थे लेकिन अब सरे नेता भ्रस्ट और मतलावी हो जाते है !

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