Mandukasana Steps, benefits, cautions ! मंडूकासन, विधि, लाभ

Mandukasana का प्रयोग पेट संबंधित रोग समस्या के लिए किया जाता है ! Mandukasana दो शब्दों के मेल से बना है पहला मंडूक जिसको सरल में मेंढक कहते हैं , तथा दूसरा आसन है ! इस योग के करने में शरीर मेंढक के समान हो जाता है इसीलिए इसे मंडूकासन के नाम से जाना जाता है ! पेट का चाहे जितना बड़ा भी समस्या हो इस योगाभ्यास के मदद से ठीक हो जाता है !

Mandukasana steps in Hindi

मंडूकासन योग को करते समय शरीर की बनाबट बिल्कुल मेंढक के जैसा हो जाता है ! इस आसन्न को करने के लिए सबसे पहले पैर के दोनों घुटने को सीधे कर लेना होता है ! मंडूकासन करने से पहले आपको बर्ज आसन्न में आना चाहिए ! तभी आप अच्छे से मंडूकासन कर सकते है !

बर्ज आसन्न में आने के लिए पहले दये घुटने को मोडेंगे , दाई एडी को निचे लेकर जायेंगे ! फिर बाये घुटने को मोडेंगे और बाये नितं को निचे लेकर जायेंगे ! अब आप बर्ज आसन्न में आ गए ! बर्ज आसन्न में आने के बाद मंडूकासन आसन्न का अभ्यास करेंगे !

दोनों हाथो के मुठी बनायेंगे , जिसमे की अंगूंठा अन्दर होना चाहिए और चारो अन्गुंलिया बहार होना चाहिए ! जहाँ से अंगूठा को मोड़े हैं उस जगह को अपने नाभि के पास रखेंगे , शारीर के भीतर लम्वा साँस भरेंगे , और साँस छोड़ते हुए आगे की ओर झुक जायेंगे ! स्वांस को बहार छोड़ते रहेंगे पेट को अन्दर खीचते रहेंगे और पुरे पेट को अपने हाथ से अन्दर की ओर दबायेंगे ! गर्दन को हमेशा ऊपर की ओर रखेंगे , जितने देर आसन्न में रुके रहेंगे साँस को बराबर लेते और छोड़ते रहेंगे !

Mandukasana benefits in Hindi

  • इस आसन से पेट सारी समस्या से छुटकारा मिलता है जैसे –
  • पेट में गैस बनना
  • खाने के बाद ठीक से पाचन न होना
  • अपच की समस्या रहना कहने के बार बार सोच के लिए जाना
  • पेट में जलन होना
  • पेट के लगभग साडी समस्या में इस आसन्न से लाभ प्राप्त होता है !
  • जिनका पेट बढ़ा हुआ है उनको यह आसन्न बहुत ही लाभदायक होता है
  • इस आसन्न की आभ्यास से पंक्रिया सही होकर अच्छे से कार्य करता है ! जिसके परिणाम से शारीर में इन्सुलिन अधिक मात्र में बनता है !
  • यह आसन्न मधुमेह में बहुत ही लाभयादक होता है !

Mandukasana Precautions in Hindi

वो लोग इस आसन्न को बिलकुल ना करे जिनको पेट में कोई गंभीर रोग है जिनको पेट से सबंधित कोई गम्भीर रोग है ! पेट में अगर कोई विकार या ऑपरेशन हुआ हो तो इस आसन्न को न करें ! वह लोग भी इस आसन्न का अभ्यास न करे ! इस आसन्न को करते समय अगर आपको चाकर के जैसा लगे तुरंत वापस आ जाये औए धीरे धीरे अपना अभ्यास बढ़ाये ! जिन लोगो को नाभि की समस्या है वो लोग इस को बिलकुल न करें क्योंकि ये जोखिम भरा हो सकता है !

Mandukasana का खोज

भारत में मंडूकासन का खोज लगभग 5000 साल पहले हुआ था , ये शारीरिक और मानशिक संतुलन बनाये रखता है ! इसका खोज अगस्त नामक ऋषि को मन जाता है ! योग की उत्पत्ति सर्वप्रथम भारत में ही हुई थी इसके बाद यह दुनिया के अन्य देशों में लोकप्रिय हुआ. योग की बात होती है तो पतंजलि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है !


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