Mangal Chandika Stotra Pdf Download in hindi

महाकवि काली दास के अनुसार विश्व में कोई भी ऐसा प्राणी नहीं है जो स्तुति से प्रसन्न न होता हो ! इसलिए प्रत्येक देवी देवताओ को प्रसन्न करने के लिए विश्व में बहुत सारा स्त्रोत्र बना हुआ है ! स्तोत्र शव्द संस्कृत से बना है , जिसका अर्थ प्रसंसा करना होता है ! Mangal Chandika Stotra के द्वारा बहुत सारे कष्ट को दूर किया जा सकता हैं ! Mangal Chandika Stotra के पाठ से आप वशीकरण का समस्या को दूर कर सकते हैं !


व्यापारिक समस्या , गृह क्लेश ,विद्या की प्राप्ति ,मांगलिक दोष के समस्या के कारण दम्पति के विच हुए क्लेश को दूर किया जा सकता है !

Mangal Chandika Stotra

What is Mangal Chandika ?

त्रिपुर्वत के समय ब्रम्हा और विष्णु के प्रेरणा से भगवान शिव ने ने देवी दुर्गा को प्रसन्न किया था ! और उनका जो भी रूप उत्पन्न हुआ , उसे ही Mangal Chandika कहते है ! मंगल सातवे द्वीप का अधिपति हुआ था ,और उसके द्वारा पूजा और अभीष्ट दान से भी यह Mangal Chandika कहलाती है !

मंगल भूमि पुत्र है और उसका अभिसत्री देवी भगवती चंडी का है इसीलिए इसे Mangal Chandika कहा जाता है !

Mangal Chandika Stotra

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मङ्गलचण्डिके ,
ऐं क्रूं फट् स्वाहेत्येवं चाप्येकविन्शाक्षरो मनुः !!
पूज्यः कल्पतरुश्चैव भक्तानां सर्वकामदः ,
दशलक्षजपेनैव मन्त्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम् !!
मन्त्रसिद्धिर्भवेद् यस्य स विष्णुः सर्वकामदः ,
ध्यानं च श्रूयतां ब्रह्मन् वेदोक्तं सर्व सम्मतम् !!
देवीं षोडशवर्षीयां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम् ,
सर्वरूपगुणाढ्यां च कोमलाङ्गीं मनोहराम् !!
श्वेतचम्पकवर्णाभां चन्द्रकोटिसमप्रभाम् ,
वन्हिशुद्धांशुकाधानां रत्नभूषणभूषिताम् !
बिभ्रतीं कबरीभारं मल्लिकामाल्यभूषितम् ,
बिम्बोष्टिं सुदतीं शुद्धां शरत्पद्मनिभाननाम् !
ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां सुनीलोल्पललोचनाम् ,
जगद्धात्रीं च दात्रीं च सर्वेभ्यः सर्वसंपदाम् !
संसारसागरे घोरे पोतरुपां वरां भजे !
देव्याश्च ध्यानमित्येवं स्तवनं श्रूयतां मुने ,
प्रयतः संकटग्रस्तो येन तुष्टाव शंकरः !
शंकर उवाच रक्ष रक्ष जगन्मातर्देवि मङ्गलचण्डिके ,
हारिके विपदां राशेर्हर्षमङ्गलकारिके !
हर्षमङ्गलदक्षे च हर्षमङ्गलचण्डिके ,
शुभे मङ्गलदक्षे च शुभमङ्गलचण्डिके !
मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्व मङ्गलमङ्गले ,
सतां मन्गलदे देवि सर्वेषां मन्गलालये !
पूज्या मङ्गलवारे च मङ्गलाभीष्टदैवते ,
पूज्ये मङ्गलभूपस्य मनुवंशस्य संततम् !
मङ्गलाधिष्टातृदेवि मङ्गलानां च मङ्गले ,
संसार मङ्गलाधारे मोक्षमङ्गलदायिनि !
सारे च मङ्गलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम् ,
प्रतिमङ्गलवारे च पूज्ये च मङ्गलप्रदे !
स्तोत्रेणानेन शम्भुश्च स्तुत्वा मङ्गलचण्डिकाम् ,
प्रतिमङ्गलवारे च पूजां कृत्वा गतः शिवः !
देव्याश्च मङ्गलस्तोत्रं यः श्रुणोति समाहितः ,
तन्मङ्गलं भवेच्छश्वन्न भवेत् तदमङ्गलम् !
! इति श्री ब्रह्मवैवर्ते मङ्गलचण्डिका स्तोत्रं संपूर्णम् !

Mangal Chandika Stotra Benefits

Mangal Chandika Stotra के पाठ से विवाह एवं कार्य क्षेत्र के सभी वधाएं दूर होती है ! धन की समस्या , व्यापार की समस्या ,ग्रह कलेश , धन की प्राप्ति आदि में चमत्कारी रूप से लाभकारी होता है ! अपने कामना अनुसार इसका पाठ करना अत्यंत लाभप्रद होता है ! भगवान शिव ने इस महिमा का उलेख किया है !


जिन लोगो की कुंडली में मंगली दोष है , जिन लोग को विवाह एवं कार्य क्षेत्र में मंगल ग्रह के कारण वधाए बनते हो , तो यह स्तोत्र उन लोगो के लिए लाभकारी होता है !


पति को वश में रखने के लिए 43 दिनों तक Mangal Chandika Stotra का विधि विधान से पाठ करने पर पति चाहे जितना भी दिल – दिमाग से दूर हुआ हो उसे वशीभूत किया जा सकता है ! इस प्रयोग के लिए अनुष्ठान को पति की तस्वीर के सामने प्रतिदिन पण का पत्ता रखकर कियाता है !


Mangal Chandika Stotra का शुभारम्भ शुक्ल पक्ष में किया जाना चाहिए , इसे करने के लिए पान के एक पत्ते पर चन्दन और केसर को मिलकर रखे ! उसे लाल कपडे पर स्थापित करें ,माँ दुर्गा की प्रतिमा के चरणों में रख दे ! उसके बाद 43 दिन तक इस पाठ को करें !

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