Maruti Stotra Lyrics and PDF | मारुती स्तोत्र के लाभ

नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने वाले है Maruti Stotra के बारे में, हम मारुती स्तोत्र के बारे में सभी जानकारियाँ आप सभी देने वाले है और साथ में इसका पाठ करने से आपको क्या फायदे होते है इसके बारे में भी आप सभी को बताने वाले है ! साथ में आप हमारे इस website से Maruti Stotra PDF भी डाउनलोड कर सकते है!

मारुती स्तोत्र के अद्भुत तथा चमत्कारी स्तोत्र है, यह सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करने वाला स्तोत्र है, और भयंकर से भयंकर पीड़ा को दूर करने वाला स्तोत्र है! इस स्तोत्र के अपने बहुत से लाभ है !

मारुती स्तोत्र क्या है ?

Maruti Stotra

मारुती स्तोत्र की रचना 17बीं शताब्दी के महान संत रामदास स्वामी ने की है! मारुती स्तोत्र में हनुमान जी के वारे में बताया गया है! मारुती स्तोत्र का नियमित पाठ करने से हनुमान जी विशेष कृपा उस व्यक्ति पर बनी रहती है!

मारुती स्तोत्र के फायदे | Benefit of Maruti Stotra

मारुती स्तोत्र अपने महत्वपूर्ण लाभ है, इसका पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा उस व्यक्ति पर होती है! इसका पाठ करने से आपको महत्वपूर्ण लाभ होता है !

  • मारुती स्तोत्र का पाठ करने से जातक के ऊपर किसी भी प्रकार की मुसीबत नही आती है!
  • इसका पाठ करने से भुत प्रेत की बाधा से आप दूर रहते है! और जातक के अंदर आकर्षक शक्ति आने लगती है !
  • इसका पाठ करने से आपके सभी मनोकामना पूर्ण होती है!
  • इसका पाठ करने से आपके आत्मबल तथा आत्मविश्वास बढ़ता है!
  • मारुती स्तोत्र का पाठ करने से धन और धान्य में वृद्धि होता है!

Maruti Stotra Lyrics | मारुती स्तोत्र इन हिंदी

||श्री मारुती उपासना||

||मारुती स्तुती||

भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती।

वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना ।।1।।

महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवीं बळें ।

सौख्यकारी शोकहर्ता, धूर्त वैष्णव गायका ।।2।।

दिनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा।

पाताळ देवता हंता, भव्य सिंदूर लेपना ।।3।।

लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना ।

पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परतोषका ।।4।।

ध्वजांगे उचली बाहू, आवेशें लोटिला पुढें ।

काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ।।5।।

ब्रह्मांड माईला नेणों, आवळें दंतपंगती।

नेत्राग्नी चालिल्या ज्वाळा, भृकुटी त्राहिटिल्या बळें ।।6।।

पुच्छ तें मुरडिलें माथां, किरीटी कुंडलें बरीं।

सुवर्णकटीकासोटी, घंटा किंकिणी नागरा ।।7।।

ठकारे पर्वताऐसा, नेटका सडपातळू।

चपळांग पाहतां मोठें, महाविद्युल्लतेपरी ।।8।।

कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे ।

मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळें ।।9।।

आणिता मागुता नेला, गेला आला मनोगती ।

मनासी टाकिलें मागें, गतीस तूळणा नसे ।।10।।

अणूपासोनि ब्रह्मांडा, येवढा होत जातसे।

तयासी तुळणा कोठें, मेरुमंदार धाकुटें ।।11।।

ब्रह्मांडाभोंवते वेढे, वज्रपुच्छ घालूं शके।

तयासि तूळणा कैचीं, ब्रह्मांडीं पाहतां नसे ।।12।।

आरक्त देखिलें डोळां, गिळीलें सूर्यमंडळा ।

वाढतां वाढतां वाढे, भेदिलें शून्यमंडळा ।।13।।

धनधान्यपशुवृद्धी, पुत्रपौत्र समग्रही ।

पावती रूपविद्यादी, स्तोत्र पाठें करूनियां ।।14।।

भूतप्रेतसमंधादी, रोगव्याधी समस्तही ।

नासती तूटती चिंता, आनंदें भीमदर्शनें ।।15।।

हे धरा पंधराश्लोकी, लाभली शोभली बरी।

दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चंद्रकळागुणें ।।16।।

रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासी मंडण।

रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती ।।17।।

।। इति श्रीरामदासकृतं संकटनिरसनं मारुतिस्तोत्रं संपूर्णम् ।।

मारुती स्तोत्र इन संस्कृत

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय।

प्रतापवज्रदेहाय। अंजनीगर्भसंभूताय।

प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबंधनाय।

भूतग्रहबंधनाय। प्रेतग्रहबंधनाय। पिशाचग्रहबंधनाय।

शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय। काकिनीकामिनीग्रहबंधनाय।

ब्रह्मग्रहबंधनाय। ब्रह्मराक्षसग्रहबंधनाय। चोरग्रहबंधनाय।

मारीग्रहबंधनाय। एहि एहि। आगच्छ आगच्छ। आवेशय आवेशय।

मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय। स्फुर स्फुर। प्रस्फुर प्रस्फुर। सत्यं कथय।

व्याघ्रमुखबंधन सर्पमुखबंधन राजमुखबंधन नारीमुखबंधन सभामुखबंधन

शत्रुमुखबंधन सर्वमुखबंधन लंकाप्रासादभंजन। अमुकं मे वशमानय।

क्लीं क्लीं क्लीं ह्रुीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय।

श्रीं हृीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रुन्मर्दय मर्दय मारय मारय

चूर्णय चूर्णय खे खे

श्रीरामचंद्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु

ॐ हृां हृीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा

विचित्रवीर हनुमत् मम सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु।

हन हन हुं फट् स्वाहा॥

एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति॥

इति श्रीमारुतिस्तोत्रं संपूर्णम्॥

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मारुती स्तोत्र को आप यहा से PDF में Downlaod कर सकते है ! हिन्दी ज्ञान किसी भी प्रकार के पायरेसी को बढ़ावा नही देता है, पायरेसी करना गैरकानूनी है, इसलिए आप किताब को खरीद कर ही पढ़े !