नीम करोली बाबा-A MIRRACLE MONK WHO KNEW EVERYTHING

भारत को हमेशा से ऋषि-मुनियों की जन्मस्थली, साधु और ज्ञानियों की भूमि कहा जाता रहा है। जो सामान्य जन को अंधकार से प्रकाश के मार्ग पर ले आए, अधर्म का रास्ता छोड़ धर्म का रास्ता दिखाए और उन्हे ज्ञान के अलौकिक तेज से भर दे, उसे ही संत कहा जाता है।ऐसे ही एक संत का अवतार हमारी धरा पर हुआ जिसका अनुसरण सारा विश्व करता है।

नीम करोली बाबा (Neem karoli baba) एक चमत्कारी सिद्ध सन्त थे नीम करोली बाबा की जीवन गाथा बहुत ही रोचक है नीम करोली बाबा एक ऐसे संत थे जिनकी आराधना समूचे भारत के साथ साथ समूचे विश्व मे है नीम करोली बाबा के अनुयायी विश्व भर में फैले हैं हर धर्म हर वर्ग के लोग नीम करोली बाबा को अपने गुरु के रूप में अपनाते हुए उनके विचारो का अनुसरण करते हुए उनकी साधना में लीन होने को मजबूर हो जाते है यह संत समाज मे एक ऐसे सिद्ध संत शिरोमणि है जिनके अनुयायी एक निचले स्तर से लेकर बिलेनियर तक है जिस किसी भी व्यक्ति को नीम करोली बाबा का दर्शन होजाता था वह अपने गृहस्थ जीवन को त्याग सांसारिक मोह माया से दूर ईश्वर की साधना में लीन होने को मजबूर हो जाता था।

आडम्बर से दूर दिखावे से दूर ये है असली गुरु
कोई दिखावा नही बहुत सारे ऑफर आते थे तमाम करोड़पति जो बाबा के अनुयायी हुआ करते थे वे  उनको बोलते थे कि आपके रहने खाने सारी व्यवस्था हम करते है चलिए हमारे साथ वे साफ मना कर देते थे  और ये जो आजकल बाबा बने फिर रहे है ये सिर्फ ब्रेन वाश करते है और कुछ नहीं।
इसलिए आप अपना गुरु चुहते समय इस बात का जरूर ध्यान रखिए की जो आपका सही मार्ग दर्शन करपाए क्योकि सही रास्ता वही दिखाएंगे।

नीम करोली बाबा का जन्म व जन्म स्थान


नीम करोली बाबा का जन्म सन 1990 में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के फिरोजाबाद डिस्ट्रिक्ट में एक अकबरपुर नामक गांव के  एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था इनके पिता जी का नाम  श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा था इनके बचपन का नाम लक्ष्मण दास शर्मा था बचपन से ही बहुत ओजस्वी रहे धीरे-धीरे जैसे-जैसे इनकी उम्र बढ़ती गई इनमें सिद्ध पुरुष के सारे गुण धीरे धीरे दिखने शुरू हो गए जिसकी वजह से दूर दूर तक इनके नाम से लोग परिचित होते गए और इनसे मिलने के लिए आने लगे यह सब देख इनके पिता जी बहुत खुश होते लेकिन उन्हें कहा पता था कि एक दिन इस तेजस्वी बेटे से दूर होना पड़ेगा।

मात्र 11 वर्ष की उम्र में ही उनके ज्ञान के चक्षु सबको दिखने लगे जिसकी वजह से दिनप्रतिदिन उनसे मिलवाने वालो संख्या बढ़ती चली गयी यह सब देख पिता के दिमाग मे संदेह सा उत्तपन्न हुआ और वे इस बात को लेकर चिंतित रहने लगे फिर उनको उस ज्योतिष की बात याद आयी जिसने पैदा होने के बाद इनकी कुंडली बनाते समय यह भविष्यवाणी की थी कि आपका बेटा सन्यासी बनेगा आप चाहे जो भी करलीजिए लेकिन यह एक साधु ही बनेगा अब उनके पिता का संदेह चिंता में बदलने लगा फिर उनके पिता जी ने इस तरह की सारी सुख सुविधाये उनको दी कि उन्हें कभी सन्यास लेने की बात दिमाग मे आए ही न लेकिन कौन समझाए की विधना की लिखनी कोई नही टाल सकता और वही हुआ जिसका उनके पिता को डर था। वे महज 11 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर तपस्या के लिए निकल गए!


फिर वह कुछ दिन इधर-उधर भटकते रहे उसके बाद मैं सीधा गुजरात के बवनिया पहुंचे और वहां पर वे लगातार 7-8 वर्ष तक निरंतर कठोर तपस्या करके आठ सिद्धियां प्राप्त की। जब किसी सन्यासी के द्वारा सिद्धि प्राप्त हो जाती है तो वह स्वयं सृष्टि को संचालित कर सकता है उसमें इतनी शक्ति होती है वह सब कुछ बदल सकता है क्योंकि वह सीधा परमात्मा से जुड़ जाता है। सिद्धि प्राप्त करना इतना सरल नही होता है इसलिए जिसने भी प्राप्त कर ली वह सृष्टि को अपने अनुरूप संचालित करने की शक्ति रखता है और कर सकता है।


लक्षण दास शर्मा से कैसे बने नीम करोली बाबा


इसके पीछे एक लंबी कहानी है पहले ये इधर उधर भटकते रहते थे तो हुआ कुछ ऐसा की एक बार की बात है फरुखाबाद के पास एक गाँव पड़ता है नीम करोड़ी हुआ यूं कि ट्रेन से कही जा रहे थे तो ये ट्रैन के फर्स्टक्लास बोगी में चढ़ गए और यात्रा कर रहे थे इसी बीच ट्रेन में टिकेट चेक करते हुए टीटी इनके पास आया और टिकेट के लिए पूछा तो इन्होंने ने मना कर दिया कि टिकेट नही है साधु है साधु का टिकट फ्री रहता है ट्रेन में आज से नही जब से रेल सेवा शुरू हुई है तब से यह परंपरा रही है भारत मे।
फिर टीटी ने बोला कि यदि टिकेट नही है तो उतर जाइये आप ट्रेन से बिना टिकेट आप यात्रा नही कर सकते आप ट्रेन के फर्स्टक्लास बोगी में बिना टिकेट चढ़ कैसे गए इतना कह कर उतार दिया उतारते हुए यह भी कहा कि दुबारा मत चढ़ना।


महाराज जी उतर तो गए लेकिन जब वे ट्रेन से उतर गए तो ट्रेन आगे बढ़ने को हुई लेकिन बन्द पड़ गयी फिर से स्टार करने की कोसिस हुई लेकिन हुई ही नही बहुत देर तक कोसिस चलती रही लेकिन कहि कुछ भी नही और महाराज जी वही बैठे बैठे यह सब देख रहे थे फिर अचानक से टीटी को ऐसा महसूस हुआ कि कही जिस साधु को मैन ट्रेन से उतारा है उसी वजह से तो ऐसा नही हो रहा फिर उसने पूरी बात ट्रेन के पायलट को बताई तो उनको भी इस बात का संदेह हुआ तो सब मिलकर नीम करोली बाबा को खोजते हुए पहुचे उनके पास जहा उतर कर वे बैठे थे उन सबने अपनी गलती का एहसास करते हुए हाथ पैर जोड़ते हुए अपनी गलती स्वीकार की और उनसे विनती करते हुए उन्हें ग्रेन पुनः बैठने के लिए आग्रह करने लगे और कहने लगे कि आप बैथ जाइये जिससे हमारी ट्रेन अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सके। यह सब सुनने के बाद नीम करोली बाबा बोले ठीक है मेरी दो शर्त है अगर तुम सब स्वीकार करते हो तो मैं पुनः ट्रेन में चलने को तैयार हूं तो तुरंत टीटी व लोकोपायलत ने शर्त को पूछते हुए बोले कि आपकी क्या शर्त है और मुझे हर शर्त मंजूर है तब महाराज जी ने अपनी दोनों शर्तो को उनके सामने रखा।

  • सभी साधु सन्यासियों के साथ आप सदैव बहुत अच्छा व्यवहार करेंगे।
  • जहा पर उनको उतारा गया था वहां पर एक स्टेशन का निर्माण हो।


उनकी दोनो मांगे रेलवे स्टाफ के द्वारा मां ली गयी तब वे पुनः ट्रेन में चढ़े ट्रेन कर्मियों ने उन्हें सीट भी उपलब्ध कराई जिसके बाद ट्रेन फिर से अपने गंतव्य के लिए रवाना हो पाई।
वही से इनको सब नीम करोली बाबा कहने लगे और इनका नाम नीम करोली बाबा पढ़ गया क्योंकि जिस जगह पर उनको उतारा गया था उस जगह का नाम नीम करोड़ी था।

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स्वयं नीम करोली बाबा द्वारा स्थापित आश्रम/मंदिर

1. कैची धाम


Neem karoli baba नीम करोली बाबा के बहुत सारे आश्रम है देश विदेश तक इनके अनुयायी व आश्रम फैले हुए हैं।
इनका सबसे फेमस आश्रम कैची धाम है जो उत्तराखंड नैनीताल में स्थित है। कैची धाम का महत्व अपने आप मे बहुत महत्व रखता है।कैची धाम आश्रम नाम से ही प्रतीत होता है कि यह दो पहाडियो के बीच स्थित है,और पहाड़ियों की बनावट कुछ इस तरह की है कि वह कैची के आकार में प्रतीत होते है इसलिए कैची धाम का नाम कैची धाम पड़ा है।

2. मेहरौली आश्रम

यह आश्रम दिल्ली के जुनापुर के समीप मेहरौली में स्थित है, यह बहुत बड़े छेत्र में फैला हुआ है इस आश्रम द्वारा अस्पताल व दो विद्यालय संचालित किए जाते हैं।

3. बवनिया आश्रम

बवनिया एक ग्रामीण छेत्र है यह गुजरात के मोरवी शहर से 40किमी की दूरी पर स्थिति है, यहां पर नीम करौली बाबा द्वारा पहली मूर्ति हनुमान जी की स्थापित की गई थी, यही पर अपने सन्यासी जीवन का सबसे अधिक समय तपस्या में गुजारे थे।

4. शिमला आश्रम

यह आश्रम शिमला में है यहां पर जन जीवन से संबंधित हर जरूरी चीजों को संचालित किया जाता है और महाराज जी की जीवनगाथा का प्रचार प्रसार किया जाता है।

5. भूमिआधर आश्रम

यह आश्रम महाराज जी के एक अनुयायी ने दान की थी यहां पर सुरु में एक कमरा है और फिर मंदिर बनाया गया है। Maha Mrityunjaya Mantra Lyrics

6. कंकरीघाट आश्रम

यह आश्रम कैची से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यह स्थान संबोरी बाबा के रहने व तपस्या करने के लिए जाना जाता है, इस स्थान पर स्वामी विवेकानंद जी भी तपस्या करके ज्ञान अर्जित कर सबको प्रकाशवान किया।

7. नीम करोली आश्रम

यह आश्रम फरुख़बाफ में स्थित है, यह आश्रम ग्रामीणों के द्वारा बाबा नीम करोली के रहने के लिए गुफा के रूप में तैयार किया गया था, यह तब बनाया गया जब वे तपस्या के बबाद वापस लौटे थे।

8. वीरापुरी आश्रम

यह आश्रम चेन्नई के नजदीक स्थित है, यह हनुमान जी के मंदिर के रूप में स्थापित है यह तब किया गया महाराज जी वहां गए।

9.हनुमानगढ़ी आश्रम

यह महराज जी द्वारा स्थापित हनुमान जी का मंदिर है जो नैनीताल में मनोरा पहाड़ी पर स्थित है, महाराज जी द्वारा स्थापित मन्दिरो में से एक मंदिर यब भी है जो बाद में राज्य सरकार के द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया।

10. लखनऊ आश्रम

यह आश्रम उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित है लखनऊ के सबसे प्रसिद्ध मन्दिरो में पहला स्थान है, यह हनुमानसेतु के पास गोमती नदी के किनारे स्थित है। हर वर्ष 26 जनवरी को इस मंदिर द्वारा बहुत बड़ा भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है।

11. पनकी आश्रम

यह आश्रम उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के पनकी में पनकी रेलवे स्टेशन के पास में स्थित है, खड़े हनुमान जी जा मनोरम दृश्य हमेसा एक नई ऊर्जा निकलती रहती है। यह आश्रम प्रसिद्ध पनकी हनुमान मन्दिर के पाश ही है।

12. वृंदावन आश्रम

यह आश्रम उत्तर प्रदेश में स्थित है, महराज जी ने अपने नश्वर शरीर का परित्याग यही पर किया था। महराज जी द्वारा स्थापित यह मंदिर अद्वितीय है अद्भुत है। वृंदावन में अपनी शरीर को त्यागने के बाद उनकी शरीर समाधि स्थल को

यह सब आश्रम बाबा नीम करोली जी के कर कमलों द्वारा स्थापित किए गए हैं, इनके अलावा जितने भी नीम करोली बाबा के आश्रम/मंदिर है वह सब बाबा के अनुयायियों के द्वारा बनाया गया है उनमें कुछ महत्वपूर्ण आश्रम के नाम इस तरह हैं।

अकबरपुर आश्रम

यह आश्रम महाराज जी के अनुयायियों द्वारा बनाया गया है, यह मंदिर उनके जन्मस्थली पर स्थित है इसलिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर माना जाता है।

ऋषिकेश आश्रम

जबलपुर आश्रम

ताओस आश्रम

मिर्ज़ापुर आश्रम

यह महाराज जी के अनुयायियों द्वारा बनाए गए मुख्य आश्रमों में से है और भी देश विदेश में महाराज के अनुयायियों द्वारा बहुत सारे आश्रम चलाए जाते है।

समाधि स्थल

नीम करोली बाबा ने अपनी शरीर वृंदावन की धरा पर त्यागा था और महाराज जी की समाधि स्थल भी उसी आश्रम में है जहां पर वे समाधि में लीन हुए थे। जब उनको पता चला कि उनक

नीम करोली बाबा के सबसे अधिक अनुयायी वेस्टर्न हैं, बाबा के अनुयायी बड़े बड़े बिजनेसमैन बड़े बड़े राजनेता बड़े बड़े कलाकर लोग भी है, जो बाबा के नाम के दीवाने हैं, इनमें कुछ ऐसे हैं, जो दीक्षा के उपरांत अपना सर्वस्व त्याग कर बाबा के शिष्य बन कर ईश्वर की महिमा का मण्डन करना सुरु कर दिया। और देश विदेश में जाकर बाबा का गुणगान करते और भजन कीर्तन कर बाबा के ज्ञान का प्रचार प्रसार करते हैं। ऐसे ही कुछ शिष्यों के नाम व उनके बारे में बता रहा हूँ।

नीम करोली बाबा के शिष्य

रिचर्ड अलपर्ट अमेरीका से भारत गुमने आये थे। वह बहुत बड़े केमिस्ट थे कई सारी महत्वपूर्ण खोज की थी साथ ही वे बहुत बड़े नशेड़ी इंसान थे, एक दिन में कई LSD की गोली निगल जाते थे। एक दिन वे भारत मे घूमते हुए नीम करोली बाबा के पास पहुचे, चुकी नीम करोली बाबा जो की असाधारण व विलक्षण प्रतिभा के धनी के साथ साथ एक अद्भुत अद्वितीय गुरु थे। वे दिव्यदर्शी, सप्तदर्शी होने के साथ साथ एक बहुत काबिल तांत्रिक, जो हनुमान जी के अनन्य उपासक थे।कुल मिला कर हम यह कह सकते है कि वे असाधारण इंसान थे।

वह नीम करोली बाबा के पास आये और बोले, मेरे पास एक असली माल है जो स्वर्ग का आनंद देता है। आप इसे खाएंगे तो ज्ञान के सारे दरवाजे खुल जाजाएंगे। क्या आप इसके बारे में कुछ जानते हैं? नीम करोली बाबा ने उनसे तुरंत पूछा, यह क्या है? मुझे इसके बारे में कुछ बताओ।


इसी बीच रिचर्ड अलपर्ट ने नीम करोली बाबा को कुछ गोलियां देकर खाने को बोलने लगे तब बाबा जी ने कहा सारी गोलियां दीजिए। सारी गोलियों को मुंह में डाला और निगल गये। फिर वहां बैठकर अपना काम करते रहे। बाबा जी ने उसकी सारी गोलियां खाली थी जो उसके लिए महीनों चलती लेकिन वे तो एक बार मे ही निगल गए। रामदास वहां इस उम्मीद में बैठे रहे कि यह आदमी अभी मरने वाला है। यहां तो उनके सोच के विपरीत हो रहा था सब कुछ नीम करोली बाबा पर एलएसडी का कोई असर ही नहीं दिख रहा था। वह निरंतर अपने काम में लगे रहे, उनका मकसद बस रामदास को यह बताना था कि तुम एक फालतू सी चीज पर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हो। यह चीज तुम्हारे किसी काम नहीं आने वाली। यह सब देख व सुनकर हैरानी के साथ रिचर्ड अलपर्ट बाबा जी से पूछा कि ऐसा कैसे हुआ तब उन्होंने रिचर्ड को सच का बोध कराया जिसके तुरंत बाद रिचर्ड ने अपना समर्पण कर दिया बाबा के समक्ष और उनसे दीक्षा लेकर रिचर्ड अलपार्ट से बन गये रामदास और उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम है “मिरेकल आफ लव” यह बुक नीम करोली बाबा के ऊपर लिखी गयी है।

भगवान दास, जय उत्तलदास, म्यूजिशियन कृष्णदास इसी तरीके से बहुत सारे लोग बाबा के भक्त बने।

स्टीव जॉब्स एप्पल के संस्थापक हैं, जब इनका बिजनेस अपने जीवन के सबसे बुरे दौर में चल रहा था तब उन्होंने नीम करोली बाबा जी का दर्शन करने का ठाना और भारत आए लेकिन तब तक बाबा जी समाधि में लीन हो चूजे थे लेकिन वे आए और आश्रम का भर्मण किआ साथ ही दर्शनोपरांत जब वापस स्वदेश लौट तो उनका व्यवसाय पुनः चल पड़ा जिससे उनकी खुसी व श्रद्धा का कोई थाह नही था यदि उस समय उनकी मुलाकात महाराज जी से होती तो वे अवश्य ही सन्यास ले लेते।

मार्क जुगरबर्ग फेसबुक के संस्थापक पिछले दिनों जब वे भारत भ्रमण पर आए तो उन्होंने सर्वप्रथम बाबा के शबे प्रिय धाम कैची धाम जाने की इच्छा के साथ वे एक दिन के लिए वहां गए और उनके दर्शन पूजन किए लेकिन उनका मन आने को नही हुआ वे एक दिन के बजाय दो दिन वह गुजार दिए उस समय फेसबुक भी अपने सबसे बुरे दौर में था जिसके बाद उनका बिजनेस रफ्तार पकड़ता गया आज इस मुकाम पर आगया है। इसी तरह बहुत से ऐसे भक्त हैं महराज जी के जिनके बारे में लिखना मुश्किल है।

महराज जी को अन्य कई अलग अलग नामों से लोग बुलाते है उनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं, तिकोनिया बाबा, चमत्कारी बाबा, नीम करोड़ी बाबा, हांडी वाला बाबा आदि नामो से उनके भक्त जानते व पूजते है।

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