Padma Purana Pdf Download in Hindi

Padma Purana काफी प्रचलित है क्योकि क्योकि इसमें और पुराणों के तुलना के भगबान विष्णु का स्वरुप को और विश्तृत रूप से दिया गया है ! Padma Purana ब्रम्हा आदि देवताओ को वाक्यों और गुण से परिपूर्ण है !

What is Padma Purana ?

यह सर्व , प्रतिसर्व ,वंश , मन्वंतर और चरित इन पांचो लक्षणों से परिपूर्ण है ! भगबान विष्णु के स्वरुप और पूजा उपासना का प्रतिपादन करने के कारण इस पुराण को वैष्णव पुराण भी कहा जाता है ! इस पूरा विभिन पुराणिक वैख्यानिक का वर्णन किया गया है !

Padma Purana

पद्मा पुराण में लगभग 55000 श्लोक है लेकिन वर्तमान में श्लोक की शंख्या लगभग 48000 है ! ये पुराण ब्रम्हा जी ने पुलस्य को सुनाया था ! और आगे चलकर पुलस्य ने भीष्म को सुनाया था ! इसकी रचना लगभग 12वी शताव्दी के आस पास हुआ था !

शंकर जी विवाह

पद्मपुराण में भगवन विष्णु के साथ साथ शंकर जी का भी वर्णन किया गया है ! शंकर जी विवाह और कथाओ का उलेख मिलता है इसके साथ अन्य ऋषियों का वाक्य भी महत्वपूर्ण है ! शंकर जी विवाह के बारे बहुत सरे कथा उलेख किया गया है जैसे पारवती जी का शंकर के तपस्या करना ! शंकर जी के विवाह में भुत प्रेत का बारात में जाना इत्यादि !

पद्मा पुराण में राम कथा

पद्मा पुराण में राम जी का भी वर्णन किया गया है , पद्मा पुराण पाताल खण्ड के अतिरिक्त उतर खण्ड में भी राम कथा का व्याख्या किया गया है ! ब्रम्ह के पुत्र पुलत्स्य से विश्रवा का जन्म होता है ! तथा विश्रवा का दो पत्नी है ,वेद विद्या में प्रविद्र मन्दाकिनी जो कुवेर की माँ है ! और दुश्र विदीन माली की पुत्री कैक्शी जिसका पुत्र रावन , कुम्भकरण और विभीषण है ! विश्रवा की पत्नी कैक्शी ने शंध्या काल में प्राथना किया !

उससे रावन और कुम्भकरण का जन्म हुआ ,तथा बाद में विभीषण और सुपनखा ने जन्म लिया ! रावन ने ब्रम्हा जी को घोर तपस्या कर प्रशन्न कर लिया , तब ब्रम्हा जी ने रावन से बोले . मै तुमसे प्रशन्न हुआ बोलो क्या चाहिए तुम्हे ! और रावन ने ब्रम्हा जी वरदान प्राप्त कर काफी सक्तिशाली हो गया !

रावन शक्तिशाली होने के बाद घोर पाप करने लगा , सारे देवता गन उससे परेशान हो गए ! चाहे वो ब्रम्हा हो , या विष्णु , हर कोई उससे डरने लगे ! तब विष्णु ने शीघ्र ही राम का रूप धारण कर रावन का अन्त कर दिए !

पद्मा पुराण के 6 खण्ड है !

  • सृष्टि खण्ड
  • भूमि खण्ड
  • स्वर्ग खण्ड
  • ब्रम्ह खण्ड
  • पाताल खण्ड
  • उतर खण्ड

सृष्टि खण्ड

सृष्टि खण्ड में 82 अध्याय एवं 5 उपखण्ड हैं ! सृष्टि खण्ड में शावित्री शातवन का कथा है ! पुष्कर देव के वारे में बताया गाया है !कावान्जान , धर्म्म, मूर्ति , नर्क्का शुर क्कार्त्तिक्के का वर्णन है !

भूमि खण्ड

भूमि खण्ड में भीष्म और पुलस्य के संवाद में कस्याप और आदित्य की संतान परंपरा सस्त के प्रकार तथा कुछ अन्य कथाये संकलित हैं !

स्वर्ग खण्ड

स्वर्ग खण्ड में स्वर्ग की चर्चा की गयी है मनुष्य की ज्ञान और भरत के तीर्थ का उलेख किया गया है !

ब्रम्ह खण्ड

ब्रम्ह खण्ड में पुरुसो का कल्याण एवं सुलभ विवेचन है की पुसुरो को कौन सा कार्य करना चाहिए या नहीं ! कौन कार्य उनके लिए उचित होगा और कौन सा कार्य अनुचित होगा , ये सारा कुछ वर्णन किया गया है !

पाताल खण्ड

पाताल खण्ड में श्री राम का प्रसंग का कथा के बारे में बताया गया है ! श्री राम चन्द्र के जीवन में कौन कौन से कठिनाइय आई , कौन से मुसीवत का सामना करना पड़ा इत्यादि सारा कुछ वर्णन किया गया है !

उतर खण्ड

उतर खण्ड में भक्त के स्वरुप को समझाया गया है , की किसी भी भक्त के लिए कौन सा कार्य उचित होता है ! किसी भी को अपने गुरु को आदर करना चाहिए इत्यादि सारा कुछ बताया गया है !

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