Rahu Beej Mantra राहू बीज का लाभ व विधि

Rahu Beej Mantra एक नौग्रह का मन्त्र है! वैसे राहू का दो मन्त्र होता है, एक बीज मन्त्र होता है और एक तांत्रिक मन्त्र होता है!

भारत में शक्ति और लाभ के ग्रंथों में नौ प्रमुख खगोलीय पिंड हैं। इन्ही नौ निकायों को “नवग्रह” कहा जाता है, और उन नौ ग्रहों के लिए पूरी तरह से समर्पित मंदिर हैं। उनका आशीर्वाद लेने व ग्रहों की वेदना से मुक्ति के साथ ही उन्हें खुश करने के लिए लोग उन्हें चौतरफा घेर कर आराधना करते हैं। इन नवग्रहों में से एक ग्रह राहु है।

ऐसा माना जाता है कि जिस पर राहु का प्रकोप होता है उस पर केतु का भी प्रकोप रहता है। अंग्रेजी में राहु और केतु को क्रमशः उत्तर और दक्षिण चंद्र नोड्स के रूप में जाना जाता है। हर बीज मंत्र की अपनी एक शक्ति होती है। बीज मंत्र का जप ग्रहों के प्रकोप से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।

इसका लाभ तभी मिलता है जब यह सही ढंग से उच्चारण साथ विधि पूर्वक जप किया जाता है। और हर एक दिन में लगातार 108 बार मन्त्र का जाप किया जाता है, तो उसमें वह शक्ति व लाभ होता है जिसकी आप कभी कल्पना भी नहीं कर सकते, जब तक कि आप उसे स्वयं अनुभव न करें।

राहु बीज मंत्र की शक्ति

RAHU BEEZ MANTR

यदि आपने इस जन्म के समय या अपने पिछले जन्म में भी बड़े या छोटे पाप किए हैं, और उसकी वजह से आपका जीवन कष्टक बना हुआ है हर तरह की नई नई परेशानी आपके सामने पैदा हो रही है आप एक समस्या का निदान नही करपाते तब तक नई समस्या पैदा हो रही है तो ऐसे में निश्चित ही आपकी कुंडली मे किसी न किसी ग्रह का प्रवेश हो गया रहता है।

ऐसी दशा में राहु का प्रभाव आपको सबसे अधिक परेशान करता है और उसकी निजात के लिए आपको तो स्वच्छ निर्मल मन से राहु बीज मंत्र का जाप करके अपने दैनिक जीवन आने वाली सारी विशुद्धियों को दूर शुद्ध करके अपने जीवन को कष्ट मुक्त कर सकते हैं। परंतु आपका इरादा आपकी आत्मा को अपने जीवन की समस्याओं को शुद्ध व खत्म करने का होना चाहिए और राहु आपको उसी के साथ आशीर्वाद देगा।

यदि किसी के उपर राहु का प्रकोप होता है तो उसका वैवाहिक समय सारिणी अत्यधिक प्रभावित होता है जिसकी वजह से उनका विवाह होने में कई सारी परेशानियों के साथ नाना प्रकार की अड़चने आती हैं। राहु बीज मंत्र (RAHU BEEZ MANTRA) का जाप उन लोगों द्वारा किया जाता है तो उनके वैवाहिक समय सारिणी में आने वाली व्याधा दूर होती है और वे विवाह करने में समर्थ होते हैं।

RAHU BEEZ MANTRA
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Benefits of Rahu Beej Mantra राहू बीज मंत्र के लाभ

राहु बीज मंत्र (RAHU BEEJ MANTRA) का जाप करने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आप अपनी, और किसी की भी, सभी प्रकार की बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा कर सकते हैं। यह आपकी आभा को मजबूत बनाता है, क्योंकि यह आपको ब्रह्मांड में ऊर्जा से जोड़ता है। राहु बीज मंत्र आपको सुंदर शक्तियों से भर सकता है। यह उन तरीकों से आपको आशीर्वाद दे सकता है, जिनके बारे में आपको अंदाजा नहीं है। राहु बीज मंत्रों (RAHU BEEJ MANTRA) का जाप आपको ऊर्जावान कर सकता है। राहु बीज मंत्र की सहायता से सभी प्रकार के भौतिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

राहू बीज मन्त्र

।।ॐ भ्राँ भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।। यह मंत्र हर जगह प्रयोग की जाने वाली राहू बीज मंत्र की मुख्य मन्त्र है।

ह्रीं अर्धकायं महावीर्य चंद्रादित्य विमर्दनम्।

सिंहिका गर्भ संभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्।।
ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहु प्रचोदयात्।

RAHU BEEZ MANTRA

राहु का वैदिक मंत्र

ॐ कयानश्चित्र आभुवदूतीसदा वृध: सखा। कयाशश्चिष्ठया वृता।।

राहु का तांत्रोक्त मंत्र

।।ॐ  ऎं ह्रीं राहवे नम:।।
।।ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:।।
।।ॐ ह्रीं ह्रीं राहवे नम:।।

राहू नाम मन्त्र

।।ॐ रां राहवे नम:।।

राहु का पौराणिक मंत्र

।।ॐ अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम,
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम।।

राहु के अशुभ होने के संकेत

यदि आपके जीवन मे राहू दोष है तो आपको मानसिक तनाव, लगातार आर्थिक नुकसान, स्वयं की कार्यक्षमता को लेकर गलत फहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर क्रोधित होना, निरंतर वाणी में कठोरपन बढ़ते जाना, सामान्य बातचीत में अपशब्दों के प्रयोग के साथ सामने वाले से उलझ जाना, इन सब के साथ ही आपके शरीर से हाथ पैर के नाखून स्वयं ही छोटे कण के रूप में टूटने लगते हैं। यह सारे संकेत यह दर्शाते हैं कि आपके कुंडली मे राहु का दोष है। इसके निवारण के लिए दिए गए मन्त्र का बताए गए विधि पूर्वक जाप करें अवश्य ही लाभकारी होगा और आपको इस कष्ट से छुटकारा प्राप्त होगा।

राहू बीज मंत्र की जाप विधि

आप राहु बीज मंत्र (RAHU BEEJ MANTRA) के जप के लिए जितना अधिक समर्पित हो सकते हैं उतना ही होइए। मंत्र जप में दृढ़ निश्चय होना चाहिए, आपको इसे कम से कम राहु के लिए इस मंत्र का जाप रात के समय करना चाहिए। घर के मंदिर में कालभैरव या शिवजी का पूजन करें। यहां बताए गए राहु मंत्र का जाप रात में 18,000 बार और लगातार 41 दिन तक करना चाहिए। इसके अलावा राहु के लिए कुछ अन्य मंत्र भी 41 दिनों तक हर रात लगातार करने की आवश्यकता होती है।

अपनी इच्छाओं को प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन 108 बार राहु बीज मंत्र का जाप किया जाना आवश्यक है। अगर आप राहु बीज मंत्र के जाप को शुरुआत में कम से कम 15 मिनट तक या इससे अधिक देर तक ध्यान लगा कर करते हैं, तो यह आपको अधिक शक्ति देगा। लेकिन आपको यह ध्यान रहना चाहिए कि जब व आप जाप साधना में बैठे आपको अपने चिर को शांत करके तमाम जिम्मेदारियों को भूल कर मन्त्र के जाप में लीन हो जाना है।

राहु बीज मंत्र (RAHU BEEJ MANTRA) का जाप आप घर मे कर सकते हैं, नौग्रह मंदिर में कर सकते हैं, किसी ऐसी साफ सूथी जगह पर कर सकते हैं जहा आपको किसी तरह की व्याधा न उतपन्न हो और कोई भी बीच मे रोक टोक न पैदा कर सके इस बात का आपको खास ध्यान रखना है। जब भी आप जाप के लिए साधना में बैठे आप अपने समक्ष मिट्टी के दिए में सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और नित दिन नए दीपक का प्रयोग करें। यदि आप पीतल का दीपक जलाते हैं तो उसे नितदिन साफ करना है।

दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद अपने सामने रख कर आप आसान में बैठ जाए और अपनी आंखों को बंद करके ध्यान केंद्रित करते हुए राहु बीज मंत्र (Rahu Beej Mantra) का उच्चारण प्रारम्भ करे। यह सुनिश्चित कर लें कि बीज मंत्र का उच्चारण शुद्ध हो। प्रतिदिन दिन आपको 11 माला करना है इससे अधिक आपकी क्षमता के अनुसार लेकिन जाप तब तक ही करें की जब तक चिर शांत हो और मन ध्यान में लीन हो।

एक माला मतलब 108 बार मन्त्र का उच्चारण इसमे आप यदि बिना माला के जाप कर सकते है, तो करें अन्यथा आप रुद्राक्ष की माला, चंदन की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपको मन्त्र गणना में आसानी होती है।

राहू दोष से बचाव के लिए इन वस्तुओं का दान करें

राहू से पीड़ित व्यक्ति गोमेद, सोना, सीशा, नीला कपड़ा, तिल, सरसों का तेल, तलवार, कम्बल, घोड़ा, काला फूल आदि दान कर सकता है।

राहू काल का समय

राहू काल का समय सप्ताह के सातो दिन रहता है लइकन भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका खास प्रभाव रविवार, मंगलवार और शनिवार के दिन रहता है। राहु काल के समय सुरु किए गए कार्य या तो विफल हो जाते हैं, या फिर सफलता के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। राहु काल को अशुभ फल देने वाला ग्रह माना गया है।

राहू का नाम सुनते ही सबके दिमाग मे नकारात्मक ध्वनि गूँजने लगती है। और नकारात्मक विचार आने लगता है। राहू काल हर दिन 90 मिनट के लिए लगता है। इस दौरान हुए किसी भी शुभ कार्य को अशुभ माना जाता है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के किसी समय मे राहुकाल लग सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस अवधि के आठवे स्थान का स्वामी राहू है। राहू का समय प्रतिदिन उस दिन के हिसाब से बदलता रहता है।

दिनानुसार राहू काल का समय

  • सोमवार -प्रातः 7:00 बजे से सुबह 9:00 बजे तक
  • मंगलवार – दोपहर 3 बजे से सायं 4:30 बजे तक
  • बुधवार – मध्यान्ह 12 बजे से दोपहर 1:30बजे तक
  • वृहस्पतिवार – दोपहर 1:30 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक
  • शुक्रवार – सुबह 10:30 बजे से माध्यान्ह 12:00 बजे तक
  • शनिवार – सुबह 9:00 बजे से सुबह 10:30 बजे तक
  • रविवार – सायं 4:30 बजे से सायं 6:00 बजे तक

राहू काल मे न करें यह काम

इस समय किसी भी विशेष तरह के कोई मांगलिक कार्यों की पूजा नही की जानी चाहिए। कोई भी नया शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। किसी नए कार्य के सिलसिले में यात्रा से बचना चाहिए। इस दौरान लेनदेन से बचना चाहिए। मकान, वाहन, आभूषण अन्य कोई भी जरूरत का सामान खरीदने से बचें। इस समय के दौरान कोई भी धार्मिक कार्य करने से बचें। विवाह गृहप्रवेश करने से बचें।

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