Shri Laxmi Chalisa Pdf Downlaod in Hindi

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प्रत्‍येक वर्ष कार्तिक के अमावस्‍या के दिन लक्ष्‍मी पूजन करने का नियम है ! इस दिन प्रभु श्रीराम रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्‍त करके अयोध्‍या लौटे थे ! इसी दिन भगवान विष्णु जी ने दैत्‍यराज बलि की कैद से लक्ष्‍मी सहित अन्‍य देवी देवताओं की छुड़वाया था , और उनका सारा धन, राजपाठ और वैभव लक्ष्‍मी की कृपा से पुन: स्थापित हुआ था ! इसलिए दीपावली के दिन माँ लक्ष्‍मी जी का पूजा होता है !

Laxmi Chalisa

Shri Laxmi Chalisa in Hindi


!! दोहा !!

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास !
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस !!

  • हे मां लक्ष्मी मै तेरा दासी हूँ , दया करके मेरे हृदय में वास करो ! हे मां मेरी मनोकामनाओं को सिद्ध कर मेरी आशाओं को पूरा करे !!

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं !
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका !!

  • हे मेरी मां आपसे यही विनती है, मैं हाथ जोड़ कर बस यही प्रार्थना करता हूं ! आप हर प्रकार से मेरे यहां निवास करें , हे जननी, हे मां जगदमा आपकी जय हो !!
  • हे सागर पुत्री मैं आपका स्मरण करता हूं, मुझे ज्ञान, बुद्धि, धन और विद्या का दान दो . आपके जैसा दूसरा कोई और उपकारी , दानी नहीं है ! हरेक तरह से हमारी इच्छा पूरी हों, आप ही सबको सहारा देने वाली हो, सबकी सहायता करने वाली हो !आप ही घट-घट में रहने वाली हैं ,ये हमारी आपसे विनती है ! हे संसार को जन्म देने वाली सागर पुत्री आप गरीबों को हर प्रकार से कल्याण करती हैं . हे जगत जननी माँ जगदम्बा आपकी जय हो !
  • हे माता महारानी हमलोग हर दिन आपकी विनती करते हैं ! हे जगत जननी माँ भवानी, सब पर अपनी कृपा बनाये रखें ! आपकी गायन हम किस प्रकार करें , हे मां हमारे सारे अपराधों को भुलाकर हमारी सुध लें ! मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि रखते हुए हे माँ जननी, मेरा विनती को स्वीकार कर लीजिये ! आप ज्ञान,धन , बुद्धि व सुख प्रदान करने वाली हैं, आपकी जय हो, हे मां हमारे सब संकटों का हरण करो !

  • जब भगवान विष्णु ने समुन्द्र का मंथन करवाया तो समुन्द्र से चौदह रत्न प्राप्त हुआ था ! हे माँ सुखरासी(लक्ष्मी ), उन्हीं चौदह रत्नों में से एक रत्न आप भी थी , जिन्होंने भगवान विष्णु की धर्मपत्नी बनकर उनकी सेवा कीये ! भगवान विष्णु ने जहां भी जन्म लिये है आपने भी वहां रुप बदलकर उनकी सेवा कीये है ! अंतर्यामी भगवान विष्णु ने आपको अपनाया, पूरा विश्व जानता है कि आप ही तीनों लोकों की स्वामी हैं !
  • आपके समान और कोई दूसरी शक्ति नहीं आ सकती। आपकी महिमा का जितना ही बखान करे उतना भी कम होगा ! जो भी मन, वचन और कर्म से आपका सेवा करता करता है, उसके मन की हर एक मनोकामना पूरी होती है ! मन से छल, कपट और चतुराई को हटाकर कर माँ की पूजा करनी चाहिए ! इसके अलावा मैं क्या कहूं, जो भी व्यक्ति मन लगाकर इस पाठ को करता है, उसे कोई कष्ट नहीं होता एवं मनवांछित फल प्राप्त होता है !
  • हे दुखों को हरने वाली मां आपकी जय हो, आप हर प्रकार के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करती हो ! जो भी व्यक्ति laxmi chalisa को पढ़ता है और पढ़ाता है या ध्यान लगाकर सुनता और सुनाता है, उसे किसी भी प्रकार का रोग नहीं सताता, उसे पुत्र एवं धन संपत्ति की प्राप्त होती है ! पुत्र एवं संपत्ति हीन हों अथवा अंधा, बहरा, कोढि या फिर बहुत ही गरीब ही क्यों न हो यदि वह ब्राह्मण या पण्डित को बुलाकर आपका पाठ करवाता है और दिल में किसी भी प्रकार की शंका या छल नहीं रखता और पूरे विश्वास के साथ पाठ करवाता है ! तो मां लक्ष्मी आप उस पर अपनी दया बरसाती हैं !
  • इस पाठ को चालीस दिनों तक करवाने से सुख-समृद्धि और संपत्ती प्राप्त होता है ! हे माते जो बारह महीने आपकी पूजा करता है, उसके जैसा धन्य और दूसरा कोई भी नहीं हो सकता ! हे माते जो भी व्यक्ति मन ही मन हर रोज आपका पाठ करता है, उसके समान भी संसार में कोई भक्त नहीं हो सकता है ! हे माते मैं आपकी तारीफ क्या करुं, आप अपने भक्तों की परीक्षा भी बहुत अच्छे तरीके से लेती हैं !
  • जो भी पूर्ण विश्वास कर नियम से आपके व्रत का पालन करता है, उसके हृद्य में प्रेम उपजता है व उसके सारे कार्य सफल होते हैं। हे मां लक्ष्मी, हे मां भवानी, आपकी जय हो। आप गुणों की खान हैं और सबमें निवास करती हैं। आपका तेज इस संसार में बहुत शक्तिशाली है, आपके समान दयालु और कोई नहीं है। हे मां, मुझ अनाथ की भी अब सुध ले लीजिये। मेरे संकट को काट कर मुझे आपकी भक्ति का वरदान दें।
  • हे मां अगर कोई भूल चूक हमसे हुई हो तो हमें क्षमा कर दें, अपने दर्शन देकर भक्तों को भी एक बार निहार लो मां। आपके भक्त आपके दर्शनों के बिना बेचैन हैं। आपके रहते हुए भारी कष्ट सह रहे हैं। हे मां आप तो सब जानती हैं कि मुझे ज्ञान नहीं हैं, मेरे पास बुद्धि नहीं अर्थात मैं अज्ञानी हूं आप सर्वज्ञ हैं। अब अपना चतुर्भुज रुप धारण कर मेरे कष्ट का निवारण करो मां। मैं और किस प्रकार से आपकी प्रशंसा करुं इसका ज्ञान व बुद्धि मेरे अधिकार में नहीं है अर्थात आपकी प्रशंसा करना वश की बात नहीं है।
  • हे दुखों का हरण करने वाली मां मेरे पास दुख ही दुख हैं, आप सब पापों नष्ट कर दो, हे शत्रुओं का नाश करने वाली मां लक्ष्मी आपकी जय हो, जय हो ! रामदास प्रतिदिन हाथ जोड़कर आपका ध्यान करते हुए आपसे प्रार्थना करता है ! हे मां लक्ष्मी अपने दास पर दया करो अपने भक्तों पर नजर रखना !


श्री लक्ष्मी पूजा विधि

  • एक चौकी , माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां ले उस पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां इस प्रकार से रखें कि माँ लक्ष्मी दाईं दिशा में श्रीगणेश रहें एवं दोनों का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए !
  • माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति के सामने बैठकर चावलों पर कलश की स्थापना करें !
  • इस कलश पर एक नारियल में लाल कपडा लपेट कर इस प्रकार रखें कि उसका केवल आगे का हिस्सा ही दिखाई दे !
  • दो बड़े दीपक ले, एक दिया में घी एवं दूसरे दिया में तेल भरकर रख दें ! एक दिया को मूर्तियों के चरणों में और दूसरे दिया को चौकी की दाईं तरफ रखें !
  • दो बड़े दीपक के अलावा एक छोटा दिया गणेशजी के पास भी रखें !
  • फिर शुभ मुहूर्त के समय जल, मौली, अबीर, चंदन, गुलाल, चावल, धूप, बत्ती, गुड़, फूल, धानी, नैवेद्य आदि लेकर सबसे पहले जल से पवित्रीकरण करें ! फिर सभी दिया को जलाकर उन्हें नमस्कार करें ! उन पर चावल का छिडकाव कर दें ! laxmi chalisa का पाठ करें और आरती उतारें ! यह पाठ चालीस दिनों तक करवाए , शुभ मन जाता है !

Downlaod Shri Laxmi Chalisa

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