What is IPC (Indian Penal Code) Full Details

भारतीय दंड संहिता जिसे हम IPC (Indian Penal Code) कहते है! IPC एक मौलिक कानून है! किसी भी देश के नागरिको द्वारा किये अपराधो को दंडित करने के कुछ प्रावधान बनाये गये है! इसे 1833 चार्टर एक्ट के तहत 1860 में अस्त्तिव में आया !

चार्टर एक्ट के आने के बाद 1834 में कानून आयोग बना जिसके पहले चैरमैन लार्ड मैकाले थे ! जब पहला कानून आयोग बना तो उसके सिफारिश पर ही IPC ( भारतीय दंड संहिता ) बना ! 1860 में यह पहली बार संसद में पास हुआ और 1862 में इसे लागू कर दिया गया !

उस समय यह Indian Penal Code अंग्रेजो पर भी लागू था, लेकिन देश के स्वतंत्र और बटवारा होने के बाद इसमें कुछ संसोधन करने के बाद अपनाया गया ! Indian Penal Code आज के समय में सबसे बड़ा Criminal Law है और यह देश के सभी नागरिको पर लागू होता है!

Why was the Indian Penal Code implemented?

What is IPC | Indina Penal Code kya hai

भारतीय दंड संहिता को लागु करना इसलिए जरुरी था ! सभी नागरिको को एक सामान अपराध के लिए एक समान सजा मिल सके! अगर किसी व्यक्ति ने चोरी किया है और वह चाहे आमिर हो या गरीब हो, उसने बड़ी चोरी की हो या छोटी चोरी हो, सबके लिए एक सामान सजा का प्रावधान किया जा सके !

IPC ( Indian Penal Code) देश में सभी प्रकार के अपराधो को अलग करता है, यानी किस – किस प्रकार के अपराध होते है और किस अपराध के लिए सजा का क्या प्रावधान है! इसको भारतीय दंड संहिता में निर्धारित किया गया है!

How many Chapters and Section in IPC

भारतीय दंड संहिता ( Indian Penal Code ) में कुल 23 चैप्टर और कुल 511 धाराएँ है ! इन सभी धाराओं में जितने भी प्रकार के अपराध हो सकते है सबको अलग अलग किया गया है और उसके लिए क्या सजा हो सकती ये सभी निर्धारित किये गये है!

How to Define offenses & Provide Punishments

IPC में आपको सिर्फ धाराएं बतायीं गयी है की आपको किस अपराध के लिए कौन सा सजा और दंड लग सकता है ! लेकिन किसी भी सजा को स्पष्ट करने के लिए आपको CrPC की मदद लेनी होती है जिसे हम Code of Criminal Procedure कहते है!

CrPC की मदद से हम अपराध को स्पष्ट करते है और सम्बंधित अपराधी को हम सजा दिलवाते है! CrPC को हमने 1973 में पारित किया गया और 1974 में लागू कर दिया गया !

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Interesting Facts About Indian Penal Code

आप सभी को भारतीय दंड संहिता के कुछ महत्पूर्ण फैक्ट्स के बारे में भी जरुर जानना चाहिए तो आइये देखते है की वो क्या है!

  1. सेक्शन 510 में आपको 24 घंटे की जेल और 10 रूपये का जुर्माना देना होता है! इसमें अगर आप शराब पीकर पब्लिक में हंगामा करते है तब इस सजा का प्रावधान किया गया है!
  2. सेक्शन 491 में आपको कुछ ना करने के लिए दंडित किया जाता है! इसमें अगर कोई बीमार व्यक्ति है या कोई असहाय व्यक्ति है और आप उसकी सेवा करने से मना करते है तो उसके लिए आपको दंडित किया जाता है! इसमें आपको 3 महीने की जेल और 200 रूपये का जुर्माना देना पास सकता है!
  3. सेक्शन 309 में अगर आप सुसाइड कमिट करते है, लेकिन आप नही मरते तो उसके लिए भी आपको सजा दी जाती है!
  4. सेक्शन 335 में आपको 4 साल की सजा दी जाती है, जबकि IPC में ज्यादातर सजा 3 से साल तक या उम्रकैद की सजा है !

IPC की कुछ प्रमुख धाराएं और उनके काम नीचे दिए गए हैं

  • आईपीसी धारा 300- हत्या.
  • आईपीसी धारा 301- जिस व्यक्ति की मॄत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मॄत्यु करके आपराधिक मानव वध करना.
  • आईपीसी धारा 302- हत्या के लिए दण्ड.
  • आईपीसी धारा 303- आजीवन कारावास से दण्डित व्यक्ति द्वारा हत्या के लिए दण्ड.
  • आईपीसी धारा 304- हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए दण्ड.
  • आईपीसी धारा 304क- उपेक्षा द्वारा मॄत्यु कारित करना.
  • आईपीसी धारा 304ख- दहेज मृत्यु.
  • आईपीसी धारा 305- शिशु या उन्मत्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण.
  • आईपीसी धारा 306- आत्महत्या का दुष्प्रेरण.
  • आईपीसी धारा 307- हत्या करने का प्रयत्न.
  • आईपीसी धारा 308- गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास.
  • आईपीसी धारा 309- आत्महत्या करने का प्रयत्न.
  • आईपीसी धारा 310- ठग.
  • आईपीसी धारा 311- ठगी के लिए दंड.
  • आईपीसी धारा 312- गर्भपात कारित करना.
  • आईपीसी धारा 313- स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात कारित करना.
  • आईपीसी धारा 314- गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु.
  • आईपीसी धारा 315- शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य.
  • आईपीसी धारा 316- ऐसे कार्य द्वारा जो गैर-इरादतन हत्या की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात शिशु की मॄत्यु कारित करना.
  • आईपीसी धारा 317- शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का परित्याग और अरक्षित डाल दिया जाना.
  • आईपीसी धारा 318- मृत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना.
  • आईपीसी धारा 319- क्षति पहुंचाना.
  • आईपीसी धारा 320- घोर आघात.

निष्कर्ष भारतीय दंड संहिता

आज के लेख में हमने जाना की भारतीय दंड संहिता क्या है, इसमें आपको अपराध और उसके सजा का प्रावधान किया गया है ! इसे कैसे स्पष्ट किया जाता है और सजा कैसे दिलवाई जाती है! तथा मैंने आप सभी को कुछ महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में भी बताया है!

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